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एक साधना है रंगमंच : अनुपम श्याम


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Shahjahanpur:

छोटे पर्दे के चर्चित सीरियल ‘प्रतिज्ञा के सज्जन सिंह यानी अनुपम श्याम ओझा शाहजहांपुर में थे। रौबदार चेहरे वाले ओझा ने खुलकर बातें की। उन्होंने बताया कि उनकी जल्द ही दो फिल्में आने वाली हैं। वह जंक्शन बनारस और एनकाउंटर में नजर आएंगे। बोले-प्राचीन चीजें किताबों के जरिए मिलती हैं। लेकिन वर्तमान में गूगल ही ज्ञान गुरु बन गया। अभिमुख संस्था की ओर से आयोजित जश्न-ए-कल्चर कार्यक्रम में शामिल होने आए अनुपम श्याम ने बातचीत में कहा कि रंगमंच एक साधना है, इसके लिए गूढ़ अध्ययन करने की जरूरत है, लेकिन आज रंगकर्मी ऐसा नहीं कर रहे हैं। उनके लिए थियेटर करने का मकसद सिर्फ मुंबई जाना भर है। हर कोई दो-चार नाटक करने के बाद सलमान या शाहरूख खान बनना चाहता है। जो रंगमंच और कलाकार दोनों के लिए सही नहीं है। इसके लिए तपस्या करनी होगी। क्रिएटिविटी खत्म हो रही है। ओझा ने कहा कि महाराष्ट्र, दिल्ली, मुंबई व दक्षिण राज्यों में रंगमंच का काफी क्रेज है। वहां दर्शक टिकट लेकर शो देखते हैं। जबकि उत्तर प्रदेश में दस रुपये भी नहीं खर्च करना चाहते। यह गलत है, निर्देशक को नाटकों में जान पैदा करनी होगी। कंटेंट पर भी ध्यान देना होगा। अभिनेता अनुपम श्याम ओझा ने अभी तक 20 से 25 सीरियलों में काम किया। वहीं लिटिल बुद्धा, बैडिट क्वीन, लगान, शक्ति पॉवर, हल्ला बोल, रक्त चरित्र, स्लम डॉग मिलेनियम, गांधीगिरी जैसी फिल्मों में अपने अभिनय की छाप छोड़ी। उन्होंने बताया कि फिल्म या नाटक के सेट पर टेक्निशयन व अन्य के मुंह से वाह निकलें, तब संतुष्टि मिलती है। प्रतापगढ़ के रहने वाले ओझा ने भारतेंदु नाट्य अकादमी से पास आउट अनुपम श्याम ने 1989 से अपना कॅरियर शुरू किया था। प्रतिज्ञा के सज्जन सिंह और अनुपम श्याम ओझा में क्या फर्क है? उनका जबाव था कि आपके सामने पढ़ा-लिखा ब्राह्मण बैठा है। जबकि, सीरियल में अंगूठा टेक ठाकुर। बताया कि मुंबई में लंबे समय तक काम करने के बाद गांव की ओर लौट रहा हूं। शहीदों की नगरी में आने पर ओझा ने अपने पुराने दिन भी याद किए। बोले कि नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की लाइब्रेरी में जाने पर किताबें देखकर सोचा था कि इतना ज्यादा पढ़ना पड़ता है। बीएनए से गेट आउट कहकर निकाल दिया गया था।

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